निराश मन में कैसे भरें उत्साह | आज के एकाकी जीवन का सच

निराश मन में कैसे भरें उत्साह | आज के एकाकी जीवन का सच

निराश मन में उत्साह, motivational,happy life

निराश मन में कैसे भरें उत्साह | आज के एकाकी जीवन का सच

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में एकाकीपन (Loneliness) धीरे-धीरे हम सभी के जीवन का हिस्सा बन गया है। चाहे बच्चे हों, युवा हों या बुज़ुर्ग—किसी के पास अपनों के साथ बैठकर सुकून के दो पल बिताने का समय नहीं हैऔर जब कभी थोड़ा समय मिलता भी है, तो हम उसे सोशल मीडिया पर रील्स देखने, दूसरों के स्टेटस और चमक-दमक भरी ज़िंदगी को देखकर बर्बाद कर देते हैं।
सोशल मीडिया पर दिखने वाली लग्ज़री लाइफ, बनावटी खुशियों और एन्जॉयमेंट की रील्स देखकर हम अक्सर उदास हो जाते हैं। हमें लगता है कि “यार, सब कितने खुश हैं, बस हम ही पीछे रह गए हैं।” लेकिन अगर उन रील्स के पीछे झांककर देखें, तो शायद उनके जीवन में भी वही ऊब, तनाव और खालीपन हो, जो हमारे जीवन में है।लग्ज़री लाइफ की रील्स देखकर हम सोचने लगते हैं कि काश हमारे पास भी पैसा होता, क्योंकि पैसा ही सब कुछ है।
जबकि सच्चाई यह है कि पैसे वाले लोग भी हमेशा खुश नहीं होते। उनके पास सुविधाएँ तो होती हैं, लेकिन अक्सर परिवार और अपने लोगों के लिए समय नहीं होता।
अब ज़रा अपने पहलू पर सोचिए।
संभव है कि हम अपनी जगह पूरी तरह खुश हो सकते हैं। क्योंकि जो हमारे पास है, वह पैसे वालों के पास नहीं—और जो उनके पास है, वह हमारे पास नहीं।
अंबानी खुले आसमान के नीचे सड़क किनारे चाय की टपरी पर दोस्तों के साथ बैठकर गपशप करते हुए चाय का मज़ा नहीं ले सकते, लेकिन हम ले सकते हैं।
वहीं, पाँच सितारा होटल के रूफटॉप पर बैठकर चाय का आनंद लेना हम शायद न कर पाएं, लेकिन अंबानी कर सकते हैं।
कोई सुपरस्टार मॉल में जाकर बंपर छूट वाली सेल में आम लोगों की तरह शॉपिंग नहीं कर सकता, लेकिन हम कर सकते हैं। वहीं 500 बीघा फार्महाउस में छुट्टियाँ मनाना हमारे लिए संभव नहीं, लेकिन किसी सुपरस्टार के लिए यह आम बात हो सकती है।
मेरे कहने का मतलब साफ है—
खुशियाँ हमारी सोच में छुपी होती हैं, हमारे व्यवहार और नजरिए में होती हैं।
हमारा मन ही तय करता है कि वह निराशा को चुनेगा या आशा को।
इसके लिए हमें खुद को व्यस्त रखना होगा।
रील्स वाली बनावटी दुनिया से बाहर निकलना होगा।
खुद को व्यस्त रखने के लिए कोई न कोई हॉबी अपनानी होगी।
चाहे घर का काम हो या ऑफिस का—अपने काम में रुचि (Interest) पैदा करनी होगी।
फिर देखिए कैसे हमारी ज़िंदगी की बोरियत और निराशा धीरे-धीरे उत्साह और ऊर्जा में बदलने लगती है।
प्रसिद्ध लेखक जोसेफ मर्फी अपनी पुस्तक “The Power of Subconscious Mind” में लिखते हैं कि हमें अपने अवचेतन मन (Subconscious Mind) को सकारात्मक रहने के आदेश देने चाहिए।
जब हम अपने भीतर सकारात्मक सोच भरते हैं, तो हमारा जीवन भी धीरे-धीरे सकारात्मक होने लगता है।
याद रखिए—
उत्साह बाहर नहीं, हमारे भीतर ही है। बस उसे पहचानने की ज़रूरत है।

#praygrajmhttps://smartbharat.live/magh-mela-2026/aghmela

visit us https://smartbharat.live

https://amzn.in/d/07ayVn5b

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *